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Showing posts from March, 2022

बहुबुद्धि सिद्धांत के निहतार्थ एवं आलोचना

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  बहुबुद्धि सिद्धांत का निहतार्थ-                                              गार्डनर के सिद्धांत का निहितार्थ यह है कि सीखने/सिखाने में प्रत्येक व्यक्ति की विशेष बुद्धि पर ध्यान देना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के पास मजबूत स्थानिक या संगीत बुद्धि है, तो उसे इन क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। गार्डनर बताते हैं कि अलग-अलग इंटेलिजेंस न केवल विभिन्न सामग्री डोमेन का प्रतिनिधित्व करते हैं बल्कि सीखने के तौर-तरीकों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। सिद्धांत का एक और निहितार्थ यह है कि क्षमताओं के आकलन में सभी प्रकार की बुद्धि को मापना चाहिए, न कि केवल भाषाई और तार्किक-गणितीय। बहुबुद्धि सिद्धांत की शैक्षिक उपयोगिता-                                                         गार्डनर का बहुबु...

शारीरिक- गतिक बुद्धि(body-kinesthetic intelligence)

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* शारीरिक - गतिक बुद्धि (Body - kinesthetic intelligence)* - इस तरह की बुद्धि में अपनी शारीरिक गति पर नियंत्रण रखने की क्षमता तथा वस्तुओं को सावधानीपूर्वक एवं प्रवीण ढंग से(skillfully) घुमाने तथा उपयोग करने की क्षमता सम्मिलित होती है।  इस तरह की बुद्धि नर्तकी में तथा व्यायामी(gymnast) में अधिक होती है जिन्हें अपने शरीर की गति पर पर्याप्त नियंत्रण रखना होता है। साथ-ही-साथ इस तरह की बुद्धि की आवश्यकता क्रिकेट खिलाड़ी, टेनिस खिलाड़ी, न्यूरोसर्जन(neurosurgeon) तथा शिल्पकारियों(artisons) आदि में अधिक होती है क्योंकि इन्हें अपनी शारीरिक गति को नियंत्रित करने में वस्तुओं का उपयोग प्रवीणतापूर्वक(skillfully) करना पड़ता है।                                               प्रस्तुतकर्ता   -                                               रंजन ...

प्रकृतिवादी बुद्धि(Naturalistic intelligence)-

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प्रकृतिवादी बुद्धि (Naturalistic intelligence)- गार्डनर ने बुद्धि के इस प्रकार को सन   1998 ई. के संसोधन के बाद जोड़ा गया है। इससे तात्पर्य व्यक्ति में प्रकृति(nature) में जो पैटर्न(patterns) तथा सममिति (symmetry) मौजूद होते हैं,  उसे सही-सही पहचान करने की क्षमता से होती है। इस ढंग की बुद्धि किसानों, जैवविज्ञानी(biologist) तथा वनस्पति वैज्ञानिक(Botanist) आदि में अधिक होता है।                                                     प्रस्तुतकर्ता   -                                         रंजन मिश्र

अस्तित्ववादी बुद्धि(Existentialistic intelligence)-

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अस्तित्ववादी बुद्धि (Existentialistic intelligence)- गार्डनर ने बुद्धि के इस प्रकार को सन 2000 ई.  के  संसोधन के में जोड़ा है।  इससे तात्पर्य, मानव संसार के बारे में छिपे रहस्यों को जिंदगी , मौत तथा मानव अनुभूति के वास्तविकता के बारे में उपयुक्त प्रश्न पूछकर जानने की क्षमता से होती है। इस ढंग की बुद्धि चिंतकों(philosopher thinkers) में अधिक देखने को मिलती है।                                                       प्रस्तुतकर्ता                                                         रंजन मिश्र  

संगीतज्ञ बुद्धि एवं स्थानिक बुद्धि

# स्थानिक बुद्धि:-(spatial intelligence) :- समस्याओं को हल करने के लिए मानसिक छवियों को जोड़ - तोड़ कर नई छवि बनाना और किसी छवि को समझना ही स्थानिक बुद्धि है। स्थानिक बुद्धि मे कल्पना शक्ति की योग्यता होती है अर्थात कल्पना करने की योग्यता पाई जाती है। जैसे:- चित्रकार, मूर्तिकार, कवि कलाकार आदि। स्थानिक तर्क, बुद्धि के अधिकांश रूपों की तरह, अपने आप कुछ नहीं करता है। इसके बजाय, आप इसे करते हैं। स्थानिक बुद्धि मे स्थानिक तर्क शामिल है जो यह समझने की क्षमता है की आम तौर पर आयामी दुनिया के साथ कैसे बातचीत की जाए। जैसेः- स्थानिक बुद्धि वाला कोई व्यक्ति अन्य वस्तुओं को बनाने के लिए 2-डी या 3-डी वस्तुओं में हेरफेर करने में सक्षम हो सकता है। * स्थानिक बुद्धि के बारे में वैन शाइको का मत है कि - वास्तुकार लियोन वैन शाइक वास्तु कला और डिजाइन के क्षेत्र में स्थानिक बुद्धिमता को अपनाने का सूत्रपात करता है उनकी पहली धारणा मानव कंप्यूटेशनल क्षमता में खुद को स्थानिक रूप से व्यवस्थित करने के लिए वास्तु कला की उत्पत्ति से संबंधित है। *वैन शाइक बताते हैं कि स्थानिक बुद्धि कैसे काम करती है और यह कैसे व्यक्...

Interpersonal intelligence & intrapersonal intelligence

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https://youtu.be/C-N8MfiBFLI

भाषागत बुद्धि और तार्किक - गणितीय बुद्धि

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भाषागत बुद्धि:- (भाषा उत्पादन और उपयोग करने की योग्यता) यह अपने विचारों को प्रकट करने तथा दूसरे व्यक्तियों के विचारों को समझने हेतु प्रवाह तथा नम्रता के साथ भाषा का उपयोग करने की क्षमता है|जिन व्यक्तियों में यह बुद्धि अधिक होती है वे शब्द कुशल होते हैं|ऐसे व्यक्ति शब्दों के भिन्न अर्थों के प्रति संवेदनशील होते हैं, अपने मन में भाषा के बिंबों का निर्माण कर सकते हैं और स्पष्ट तथा परिशुद्ध भाषा का उपयोग करते हैं|लेखकों तथा कवियों में यह बुद्धि अधिक मात्रा में होती है|उदाहरण- कुमार विश्वास, रामधारी सिंह दिनकर, सुमित्रानंदन पंत, कबीर, तुलसीदास, इत्यादि|  तार्किक-गणितीय बुद्धि:-  (तार्किक तथा आलोचनात्मक चिंतन एवं समस्याओं को हल करने की योग्यता) इस प्रकार की बुद्धि को अधिक मात्रा में रखने वाले व्यक्ति तार्किक तथा आलोचनात्मक चिंतन कर सकते हैं|वे अमूर्त तर्कना कर लेते हैं और गणितीय समस्याओं का हल के लिए प्रतीकों का पहचान अच्छी प्रकार से कर लेते हैं|वैज्ञानिकों तथा नोबेल पुरस्कार विजेताओं में इस प्रकार की बुद्धि अधिक पाई जाने की संभावना रहती है|उदाहरण-डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, ...

प्रस्तावना

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 आजकल एक प्रकार की बुद्धि के बदले बहुत से प्रकार की बुद्धियों की बात की जा रही है। इस विचार को बुद्धि की चर्चा के केंद्र में लाने का श्रेय हार्वर्ड गार्डनर को जाता है। इससे पहले अन्य मनोवैज्ञानिकों ने भी बुद्धि के सिद्धांत दिए हैं जिनमें से बिने(बुद्धि का एक कारक सिद्धांत) , स्पियरमेन(द्विकारक g तथा s factor), थार्नडाइक(बहुकारक सिद्धान्त), थर्स्टन(ग्रुप तत्व सिद्धान्त),गिल्फोर्ड(त्रि आयामी बुद्धि का सिद्धांत) हावर्ड गार्डनर   एक अमेरिकन मनोवैज्ञानिक हैं,जिनका जन्म 11जुलाई1943 को हुआ था।इन्होंने 1983 में बहुबुद्धि सिद्धांत दिया । इस सिद्धांत में इन्होंने आठ प्रकार की बुद्धों की चर्चा की और कहा कि आगे और भी प्रकार की बुद्धि खोजी जा सकती है। गार्डनर का मानना था कि कोई भी व्यक्ति इन मुद्दों में से कुछेक पर ही उत्कृष्ट हो सकता है शेष पर भी उतना ही हो ऐसा आवश्यक नहीं है। इनका यह भी मानना था कि किस प्रकार की बुद्धि को ज्यादा महत्व दिया जाएगा। यह सांस्कृतिक कारकों पर निर्भर करता है। जैसे कृषि प्रधान समाज में प्राकृतिक बुद्धि को ज्यादा महत्व दिया जाएगा। इसी प्रकार तकनीक...